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तू ने दिल से

By Arif Bhatti

Verse 1

तूने दिल से कभी अपना मुझे माना ही नहीं
मेरे ज़ख्मों में छुपे प्यार को जाना ही नहीं (2)
कितने गहरे हैं निशान हाथों में मेखों वाले (3)
ये तो सूरत है तेरी, तूने पहचाना ही नहीं (2)

Verse 2

दूर भागेगा तू कब तक, मुझको ठुकराएगा (3)
बीते लम्हात जो गया, लौट के आना ही नहीं (2)

Verse 3

ऐसी ताज़ीम फ़क़त होंठों से जो काफ़ी नहीं (3)
तूने ये दिल जब मसीहा से लगाना ही नहीं (2)

Refrain

मेरे ज़ख्मों में छुपे प्यार को जाना ही नहीं
तूने दिल से कभी अपना मुझे माना ही नहीं

तू ने दिल से Lyrics · Elroi Tunes